Monday, August 12, 2024

पुस्तकालय दिवस

 आदरणीय प्राचार्य महोदय समस्त अध्यापक जी और प्यार विद्यार्थियों आज  हम पुस्तकालय दिवस मनाने जा रहे है पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ एस  आर रंगनाथन के बारे में कुछ शब्द बोलना चाहता हूँ  डॉ एस आर रंगनाथन का जन्म 12 अगस्त1892 को हुआ सियाली मद्रास चेन्नई में हुआ उन्हें 1924 मे मद्रास विश्वविद्यालय का पहला पुस्तकालय अध्यक्ष बनाया गया और इस पद की योग्यता हासिल करने के लिए लंदन में अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड चले गए और 1962 में बेंगलुरु में प्रलेखन अनुसंधान प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कियाजिसका  उद्घाटनपुस्तकालय DRTC के सीडी देशमुख द्वारा किया गया 1952 में दूसरी जगह पर बैलगाड़ी से पुस्तक सेवा पहुंचाई और उसके बाद मोबाइल लाइब्रेरी का प्रयोग किया 1957 में भारत सरकार ने पद्म श्री की उपाधि सम्मानित किया  12 अगस्त को पुस्तकालय दिवस मनाया जाता है विज्ञान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और पुस्तकालयों को ज्ञान के केंद्रों के रूप में स्थापित किया।

 

उनके पांच नियम पुस्तकालयों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं:

Wednesday, August 7, 2024

"अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता"

 अंताक्षरी भारतीय उपमहाद्वीप में खेला जाता है, मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में। यह शब्द दो संस्कृत शब्दों "अंत" और अक्षर से बना है जिसका अर्थ है वर्णमाला का आरंभ और अंत अंताक्षरी ( अंत + अक्षरी) प्राचीन काल से चला आता स्मरणशक्ति का परिचायक एक खेल जिसमें कहे हुए श्लोक या पद्य के अंतिम अक्षर को लेकर दूसरा व्यक्ति उसी अक्षर से आरंभ होने वाला श्लोक या पद्य कहता है, जिसके उत्तर में फिर पहला व्यक्ति दूसरे के कहे श्लोक या पद्य के अंतिम अक्षर से आरंभ होने वाला श्लोक या पद्य कहता है। इसी प्रकार यह खेल चलता है और जब अपेक्षित व्यक्ति की स्मरण शक्ति जवाब दे जाती है और उससे पद्यमय उत्तर नहीं बन पाता तब उसकी हार मान ली जाती है। विद्यार्थियों में यह आज भी प्रचलित है केंद्रीय विद्यालय निज़ामाबाद में भी समय-2 पर इसका आयोजन करवाया जाता है। यह हिंदी श्लोक और अंग्रेजी शब्द में आयोजित करवाई गई। इससे बच्चों में पढ़ने की जिज्ञाषा होती है। तथा स्मरण शक्ति तेज़ होती है

Tuesday, August 6, 2024

" ब्रजभाषा पखवाड़ा "

  हमारे हिंदी के अध्यापक श्रीमान वेंकटेश्वर जी ने ब्रजभाषा पखबाड़े की शुरुआत करते हुये बताया की ब्रजभाषा एक क्षेत्रीय ग्रामीण भाषा है। अन्य भारतीय भाषाओं की तरह ये भी संस्कृत से जन्मी है। इस भाषा में प्रचुर मात्रा में साहित्य उपलब्ध है। विभिन्न स्थानीय भाषाई समन्वय के साथ समस्त भारत में विस्तृत रूप से प्रयुक्त होने वाली हिन्दी का पूर्व रूप यह 'ब्रजभाषा' अपने विशुद्ध रूप में आज भी आगरा, धौलपुर, करौली, मथुरा और अलीगढ़ जिलों में बोली जाती है जिसे हम 'केंद्रीय ब्रजभाषा' के नाम से भी पुकार सकते हैं।

ब्रजभाषा में ही प्रारम्भ में हिन्दी काव्य की रचना हुई। सभी भक्त कवियों, रीतिकालीन कवियों ने अपनी रचनाएं इसी भाषा में लिखी हैं जिनमें प्रमुख हैं सूरदास, रहीम, रसखान, केशव, घनानन्द, बिहारी, इत्यादि । वस्तुतः उस काल में हिन्दी का अर्थ ही ब्रजभाषा से लिया जाता था । भारतेन्दु की मुकरियों में व्यंग्य रूप में सामान्य व्यक्ति की प्रतिक्रिया, सामान्य जीवन के बिम्ब पर आधारित प्रस्तुत मिलती है- सीटी देकर पास बुलावै, रुपया ले तो निकट बिठावै ।

लै भागे मोहि खेलहि खेल क्यों सखि साजन ना सखि रेल भीतर-भीतर सब रस चूस हंसिहंसि तन मन धन सब मूस । ज़ाहिर बातन में अति तेज, क्यों सखि साजन नहिं अंगरेज़ ॥

Saturday, August 3, 2024

हिंदी और अंग्रेजी प्रतियोगिता

  एक बुद्धिमान व्यक्ति ने एक बार कहा था, "पोषण, आश्रय और साहचर्य के बाद, कहानियाँ ही वह चीज़ है जिसकी हमें दुनिया में सबसे अधिक आवश्यकता है।" यह कहानियाँ ही हैं जो हमारी कल्पना को पंख देती हैं और हमें हमारी भौतिक दुनिया की सीमाओं से परे परियों, ड्रेगन और इच्छाधारी पेड़ों की भूमि पर ले जाती हैं। यह हमारी कल्पना में है कि हम उन चीजों और स्थितियों को अपनाते हैं जिन्हें हम वास्तविक दुनिया से दूर रखते हैं। प्राचीन काल से ही कहानी सुनाना हमारे बचपन का अभिन्न अंग रहा है। परंपरा को जारी रखने और बच्चों में पढ़ने के प्रति जिज्ञासा और प्रेम जगाने के लिए,  छात्रों के लिए 03 अगस्त,2024 को एक कहानी कहने की प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। युवा, उत्साही कहानीकार अपने साज-सामान से लैस होकर अद्भुत कहानियाँ लेकर सामने आए। जबकि कुछ कहानियों ने दर्शकों को विचार के लिए भोजन दिया और कुछ ने नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ किया।

कहानियों का मूल्यांकन बच्चों की अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और प्रस्तुति कौशल के आधार पर किया गया। दर्शकों ने इस कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया। नन्हे-मुन्ने कहानीकारों ने सबका दिल जीत लिया और खूब तालियाँ बटोरीं


Thursday, August 1, 2024

मुंशी प्रेमचंद का प्रदर्शन और जन्मदिन समारोह

 मुंशी प्रेमचंद का प्रदर्शन और जन्मदिन समारोह स्कूल में एक समृद्ध और सांस्कृतिक अवसर के रूप में मनाया जाता है, जो छात्रों को उनके साहित्यिक योगदान और सामाजिक दृष्टिकोण से परिचित कराता है। इस खास दिन, स्कूल परिसर प्रेमचंद की रचनाओं और उनके कालखंड की झलकियों से सजाया जाता है। छात्रों द्वारा प्रेमचंद की मशहूर कहानियों जैसे "गबन", "ईदगाह", और "कर्मभूमि" पर आधारित नाटक और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाते हैं, जो उनके साहित्यिक पात्रों की गहराई और सामाजिक सन्देश को जीवंत करते हैं। कक्षा में, शिक्षक प्रेमचंद की जीवनी, उनके साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता और उनके समय के सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं, जिससे छात्रों को उनके लेखन के मूल और प्रभाव का बेहतर समझ मिलता है। इसके अलावा, छात्रों की चित्रकला और लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं, जिसमें वे प्रेमचंद की कहानियों से प्रेरित चित्र और कविताएँ प्रस्तुत करते हैं। यह समारोह न केवल साहित्यिक समृद्धि और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देता है, बल्कि छात्रों को भारतीय साहित्य की धरोहर को संजोने और समझने की प्रेरणा भी प्रदान करता है। इस प्रकार, मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन समारोह स्कूल में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक और सांस्कृतिक अनुभव के रूप में मनाया जाता है, जो उनकी रचनाओं की अनंतता और सामाजिक दृष्टिकोण को उजागर करता है।